श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  6.97.16-17 
एवमुक्त्वा ततो राजन् कर्णमाह जनेश्वर:।
अनुमान्य रणे भीष्ममेषोऽहं द्विपदां वरम्॥ १६॥
आगमिष्ये तत: क्षिप्रं त्वत्सकाशमरिंदम।
अपक्रान्ते ततो भीष्मे प्रहरिष्यसि संयुगे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजन! शत्रुओं के स्वामी दु:शासन से ऐसा कहकर दुर्योधन ने कर्ण से कहा - 'हे शत्रुनाश करने वाले! मैं पुरुषोत्तम भीष्म को युद्ध से हटने के लिए समझाकर शीघ्र ही तुम्हारे पास लौट आऊँगा। तब भीष्म के हट जाने पर तुम युद्धस्थल में शत्रुओं पर आक्रमण करना।'॥16-17॥
 
King! After saying this to Dushasan, Lord of all enemies, Duryodhan said to Karna - 'O enemy-destroyer! I will come back to you soon after persuading Bhishma, the best of men, to withdraw from the battle. Then, after Bhishma withdraws, you attack the enemies in the battlefield.'॥ 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)