श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  6.97.14-15 
एवमुक्तस्तु कर्णेन पुत्रो दुर्योधनस्तव।
अब्रवीद् भ्रातरं तत्र दु:शासनमिदं वच:॥ १४॥
अनुयात्रं यथा सर्वं सज्जीभवति सर्वश:।
दु:शासन तथा क्षिप्रं सर्वमेवोपपादय॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कर्ण की यह बात सुनकर आपके पुत्र दुर्योधन ने अपने भाई दु:शासन से इस प्रकार कहा - 'दु:शासन! तुम शीघ्रतापूर्वक सब प्रबंध करो, जिससे यात्रा की सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी हो जाएँ।'॥14-15॥
 
On hearing Karna say this, your son Duryodhana said to his brother Dushasan thus - 'Dushasana! You should quickly make all arrangements so that all the necessary preparations for the journey are completed.'॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)