Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.97.11: हे भाई! भीष्म युद्ध में गर्व करते हैं और सदा युद्ध प्रिय हैं; तथापि पाण्डवों के प्रति दयाभाव रखने के कारण वे युद्ध में उन सबको कैसे परास्त कर सकेंगे?॥ 11॥ | mahabharat अध्याय 6.97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अभिमानी रणे भीष्मो नित्यं चापि रणप्रिय:।
स कथं पाण्डवान् युद्धे जेष्यते तात संगतान्॥ ११॥
अनुवाद
हे भाई! भीष्म युद्ध में गर्व करते हैं और सदा युद्ध प्रिय हैं; तथापि पाण्डवों के प्रति दयाभाव रखने के कारण वे युद्ध में उन सबको कैसे परास्त कर सकेंगे?॥ 11॥
O dear brother, Bhishma is proud in battle and always loves war; however, because of his pity towards the Pandavas, how will he be able to defeat them all in the battle?॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥