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mahabharat 6.97.10: भीष्म सदैव पाण्डवों के प्रति दया दिखाते हैं; इसलिए वे युद्ध में इन महान योद्धाओं को पराजित करने में सर्वथा असमर्थ हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.97.10 
पाण्डवेषु दयां नित्यं स हि भीष्म: करोति वै।
अशक्तश्च रणे भीष्मो जेतुमेतान् महारथान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भीष्म सदैव पाण्डवों के प्रति दया दिखाते हैं; इसलिए वे युद्ध में इन महान योद्धाओं को पराजित करने में सर्वथा असमर्थ हैं।
 
Bhishma always shows mercy towards the Pandavas; hence he is totally incapable of defeating these great warriors in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)