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mahabharat 6.96.d1h-44: हे भरत! हे राजन! आपके और पाण्डव सैनिकों में भयंकर एवं महान् युद्ध आरम्भ हो गया, जो एक-दूसरे पर भयंकर आक्रमण कर रहे थे और कठिन पराक्रम कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक d1h-44
 
 
श्लोक  6.96.d1h-44 
तत्राक्रन्दो महानासीत् तव तेषां च भारत।
(पाण्डवानां च राजेन्द्र सैनिकानां सुदारुण:।)
निघ्नतां दृढमन्योन्यं कुर्वतां कर्म दुष्करम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे भरत! हे राजन! आपके और पाण्डव सैनिकों में भयंकर एवं महान् युद्ध आरम्भ हो गया, जो एक-दूसरे पर भयंकर आक्रमण कर रहे थे और कठिन पराक्रम कर रहे थे।
 
Bharata! O King! A terrible and great battle began between your and the Pandava's soldiers, who were attacking each other fiercely and performing difficult feats. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)