राज्यार्धं पञ्च वा ग्रामान् नाकार्षीत् स च दुर्मति:।
दृष्ट्वा हि क्षत्रियान् शूरान् शयानान् धरणीतले॥ ९॥
निन्दामि भृशमात्मानं धिगस्तु क्षत्रजीविकाम्।
अनुवाद
युधिष्ठिर ने आधा राज्य या पाँच गाँव माँगे थे, किन्तु दुष्टबुद्धि दुर्योधन ने उनकी माँग पूरी नहीं की। आज युद्धभूमि में क्षत्रिय योद्धाओं को सोते हुए देखकर मैं अपनी सबसे अधिक निन्दा करता हूँ। क्षत्रियों की यह जीविका लज्जास्पद है।॥9 1/2॥
‘Yudhishthira had asked for half the kingdom or five villages, but the evil-minded Duryodhan did not fulfill his demand. Today, seeing the Kshatriya warriors sleeping on the battlefield, I condemn myself the most. This livelihood of the Kshatriyas is a shame.॥ 9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥