श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 78-79
 
 
श्लोक  6.96.78-79 
तेषु श्रान्तेषु भग्नेषु मृदितेषु च भारत॥ ७८॥
रात्रि: समभवत् तत्र नापश्याम ततोऽनुगान्।
ततोऽवहारं सैन्यानां प्रचक्रु: कुरुपाण्डवा:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
भरत नन्दन! उस समय जब अधिकांश सैनिक परिश्रम के कारण थक गये थे, बहुत से भाग गये थे और बहुत से योद्धा कुचले गये थे, रात्रि हो गयी थी और हम अपने सेवकों को देख नहीं सकते थे, तब कौरवों और पाण्डवों ने अपनी-अपनी सेनाओं को युद्धभूमि से लौट जाने का आदेश दिया।
 
Bharata Nandana! At that time when most of the soldiers were exhausted due to exertion, many had fled and many warriors had been trampled, it was night and we could not see our servants, then the Kauravas and the Pandavas ordered their respective armies to return from the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)