श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 77-78h
 
 
श्लोक  6.96.77-78h 
एवमेते महासेने मृदिते तत्र भारत॥ ७७॥
परस्परं समासाद्य तव तेषां च संयुगे।
 
 
अनुवाद
हे भारत! इस प्रकार आपकी और पाण्डवों की विशाल सेनाएँ आपस में भिड़ गईं और युद्धभूमि में कुचली जाने लगीं।
 
Bhaarat! In this way both your and the Pandava's huge armies clashed with each other and were being trampled on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)