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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 71-72
 
 
श्लोक  6.96.71-72 
यन्त्रैश्च बहुधाच्छिन्नैस्तोमरैश्चापि काञ्चनै:।
अश्वानां रेणुकपिलै रुक्मच्छन्नैरुरश्छदै:॥ ७१॥
सादिनां भुजगैश्छिन्नै: पतितै: साङ्गदैस्तथा।
प्रासैश्च विमलैस्तीक्ष्णैर्विमलाभिस्तथर्ष्टिभि:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
अनेक टुकड़ों में कटी हुई मशीनें, सोने की गदाएँ, घोड़ों की छाती पर लगे सोने के कवच, जो धूल के कारण काले दिखाई दे रहे थे, घुड़सवारों के हाथों में पकड़े हुए तीखे और चमकदार भाले, बाजूबंद और चमकते हुए तीर, टूटे हुए और इधर-उधर बिखरे पड़े थे। 71-72.
 
Machines cut into many pieces, golden maces, golden armour covering the chests of the horses which appeared to be of a dark colour due to the dust, sharp and shining spears held in the hands of the horse-riders along with armlets and gleaming arrows were lying shattered and scattered here and there. 71-72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)