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mahabharat 6.96.69-70: हाथियों की घंटियाँ चारों ओर बिखरी पड़ी थीं। हाथियों की पीठ पर बिछाए गए फटे हुए कम्बल और गोटियाँ भी इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं। गले के अजीबोगरीब आभूषण और सोने की रस्सियाँ भी इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं।   |   mahabharat अध्याय 6.96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 69-70
 
 
श्लोक  6.96.69-70 
घण्टाभिश्च गजेन्द्राणां पतिताभि: समन्तत:॥ ६९॥
विपाटितविचित्राभि: कुथाभिरङ्कुशैस्तथा।
ग्रैवेयैश्चित्ररूपैश्च रुक्मकक्ष्याभिरेव च॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
हाथियों की घंटियाँ चारों ओर बिखरी पड़ी थीं। हाथियों की पीठ पर बिछाए गए फटे हुए कम्बल और गोटियाँ भी इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं। गले के अजीबोगरीब आभूषण और सोने की रस्सियाँ भी इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं।
 
The bells of the elephants were lying all around. The torn blankets and goads used to spread on the backs of the elephants were scattered everywhere. The strange neck ornaments and golden ropes were also scattered here and there. 69-70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)