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mahabharat 6.96.65: महान योद्धाओं के प्रतीक, पताकाएँ, साज-सज्जा, झंडे और श्वेत शंख चारों ओर बिखरे पड़े थे।   |   mahabharat अध्याय 6.96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  6.96.65 
अनुकर्षै: पताकाभिरुपासङ्गैर्ध्वजैरपि।
प्रवीराणां महाशङ्खैर्विप्रकीर्णैश्च पाण्डुरै:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
महान योद्धाओं के प्रतीक, पताकाएँ, साज-सज्जा, झंडे और श्वेत शंख चारों ओर बिखरे पड़े थे।
 
The emblems, banners, paraphernalia, flags and the white conches of the great warriors were scattered about. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)