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mahabharat 6.96.54: हाथों में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र लिये हुए भूमि पर पड़े हुए निर्जीव महारथी ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो वे जीवित हों।   |   mahabharat अध्याय 6.96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.96.54 
नानाविधानि शस्त्राणि प्रगृह्य पतिता नरा:।
जीवन्त इव दृश्यन्ते गतसत्त्वा महारथा:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हाथों में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र लिये हुए भूमि पर पड़े हुए निर्जीव महारथी ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो वे जीवित हों।
 
The lifeless great warriors lying on the ground holding various weapons in their hands appeared as if they were alive. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)