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mahabharat 6.96.5: हे पुरुषोत्तम! यह दुष्ट कर्म धन के लिए किया जा रहा है। उस धन को धिक्कार है जिसके लिए एक ही जाति के बंधुओं का इस प्रकार नाश किया जाता है।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 6.96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.96.5 
अर्थहेतोर्नरश्रेष्ठ क्रियते कर्म कुत्सितम्।
धिगर्थान् यत्कृते ह्येवं क्रियते ज्ञातिसंक्षय:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! यह दुष्ट कर्म धन के लिए किया जा रहा है। उस धन को धिक्कार है जिसके लिए एक ही जाति के बंधुओं का इस प्रकार नाश किया जाता है।॥5॥
 
‘Best of men! This wicked deed is being done for money. Shame on that money for which the brothers of the same caste are destroyed in this manner. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)