श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  6.96.49 
जातरूपमयै: पुङ्खै राजतैर्निशिता: शरा:।
तैलधौता व्यराजन्त निर्मुक्तभुजगोपमा:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
सोने या चाँदी के पंखों से सजे और तेल से धुले हुए तीखे बाण केंचुली उतारते हुए साँपों के समान सुन्दर लग रहे थे।
 
The sharp arrows fitted with feathers of gold or silver and washed with oil looked as beautiful as serpents shedding their skin. 49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)