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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.96.45 
अन्योन्यं हि रणे शूरा: केशेष्वाक्षिप्य मानिन:।
नखदन्तैरयुध्यन्त मुष्टिभिर्जानुभिस्तथा॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
उस युद्धभूमि में अनेक वीर योद्धा एक-दूसरे के बाल पकड़कर लड़ रहे थे और एक-दूसरे पर नाखूनों, दांतों, मुक्कों और घुटनों से प्रहार कर रहे थे।
 
Many brave warriors were fighting on that battlefield, grabbing each other's hair and attacking each other with nails, teeth, fists and knees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)