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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.96.42 
व्यंसितं वीक्ष्य निस्त्रिंशं सौभद्रेण रणे तदा।
साधु साध्विति सैन्यानां प्रणादोऽभूद् विशाम्पते॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! उस समय अम्बष्ठ की चलाई हुई तलवार को सुभद्रापुत्र द्वारा निष्फल होते देख, समस्त सैनिकों के मुख से 'साधु-साधु' (शाबाश) की ध्वनि युद्धस्थल में गूंज उठी।
 
O Prajanath! At that time, on seeing the sword swung by Ambashtha being rendered ineffective by Subhadra's son, the sound of 'Sadhu-Sadhu' (bravo) emanating from the mouths of all the soldiers echoed in the battle-field.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)