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mahabharat 6.96.39-40: यशस्वी सुभद्रापुत्र अभिमन्यु से व्याकुल और रथहीन होकर राजा अम्बष्ठ ने युद्धस्थल में अपने रथ से कूदकर महाबुद्धिमान सुभद्रापुत्र पर तलवार से प्रहार किया और फिर महाबली राजा कृतवर्मा के रथ पर जाकर बैठ गया।   |   mahabharat अध्याय 6.96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  6.96.39-40 
विरथो वध्यमानस्तु सौभद्रेण यशस्विना।
अवप्लुत्य रथात् तूर्णमम्बष्ठो वसुधाधिप:॥ ३९॥
असिं चिक्षेप समरे सौभद्रस्य महात्मन:।
आरुरोह रथं चैव हार्दिक्यस्य महाबल:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
यशस्वी सुभद्रापुत्र अभिमन्यु से व्याकुल और रथहीन होकर राजा अम्बष्ठ ने युद्धस्थल में अपने रथ से कूदकर महाबुद्धिमान सुभद्रापुत्र पर तलवार से प्रहार किया और फिर महाबली राजा कृतवर्मा के रथ पर जाकर बैठ गया।
 
Being troubled and chariotless by Abhimanyu, the son of the famous Subhadra, king Ambhastha jumped from his chariot and attacked the great-minded son of Subhadra in the battlefield with his sword. Then he went and sat on the chariot of the mighty king Kritavarma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)