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mahabharat 6.96.35: जिस प्रकार भेड़िया पशुओं के बीच रहकर उन्हें नोचता रहता है, उसी प्रकार भीमसेन युद्धभूमि में आपके पुत्रों का पीछा कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.96.35 
यथा हि पशुमध्यस्थो दारयेत पशून् वृक:।
वृकोदरस्तव सुतांस्तथा व्यद्रावयद् रणे॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार भेड़िया पशुओं के बीच रहकर उन्हें नोचता रहता है, उसी प्रकार भीमसेन युद्धभूमि में आपके पुत्रों का पीछा कर रहे थे।
 
Just as a wolf lives among the animals and tears them apart, similarly Bhimasena was chasing your sons on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)