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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.96.31 
तत्राद्भुतमपश्याम कुन्तीपुत्रस्य पौरुषम्।
द्रोणेन वार्यमाणोऽपि निजघ्ने यत् सुतांस्तव॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय हमने कुंतीपुत्र भीम का अद्भुत पराक्रम देखा। यद्यपि द्रोणाचार्य बाणों की वर्षा करके उसे रोक रहे थे, फिर भी उसने आपके पुत्रों का वध कर दिया।
 
Maharaj! At that time we saw the amazing valour of Kunti's son Bhima. Even though Dronacharya was stopping him by showering arrows, he still killed your sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)