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mahabharat 6.96.28: हे भरतश्रेष्ठ! वे सब वीर वहीं गिर पड़े और वसन्त ऋतु में गिरे हुए आम के वृक्षों के समान सुशोभित हो उठे॥28॥   |   mahabharat अध्याय 6.96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.96.28 
प्रपतन्त स्म वीरास्ते विरेजुर्भरतर्षभ।
वसन्ते पुष्पशबलाश्चूता: प्रपतिता इव॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! वे सब वीर वहीं गिर पड़े और वसन्त ऋतु में गिरे हुए आम के वृक्षों के समान सुशोभित हो उठे॥28॥
 
Bharatshrestha! All those brave men fell there and were adorned like blossoming mango trees that had fallen down in the spring season. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)