श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  6.96.12-13 
नायं यापयितुं कालो विद्यते माधव क्वचित्॥ १२॥
एवमुक्तस्तु पार्थेन केशव: परवीरहा।
चोदयामास तानश्वान् पाण्डुरान् वातरंहस:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
"माधव! यह समय व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए।" अर्जुन के ऐसा कहते ही शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले केशव ने उन श्वेत घोड़ों को वायु के समान वेग से आगे बढ़ाया।
 
"Madhava! This is not the time to waste." Upon Arjun's words, Keshav, the destroyer of enemy warriors, drove forward those white horses, as swift as the wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)