श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  6.96.11-12h 
संचोदय हयान् शीघ्रं धार्तराष्ट्रचमूं प्रति॥ ११॥
प्रतरिष्ये महापारं भुजाभ्यां समरोदधिम्।
 
 
अनुवाद
(तथापि मैं आपकी आज्ञा के अनुसार युद्ध करूंगा; इसलिए) 'आप शीघ्रतापूर्वक अपने घोड़ों को दुर्योधन की सेना की ओर हांकें, जिससे मैं इन दोनों भुजाओं के बल पर सेना के इस विशाल सागर को पार कर सकूं।
 
(However, I will fight as per your orders; therefore) 'Quickly drive your horses towards Duryodhana's army, so that I can cross this vast ocean of army with these two arms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)