श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  6.96.10-11h 
अशक्तमिति मामेते ज्ञास्यन्ते क्षत्रिया रणे॥ १०॥
युद्धं तु मे न रुचितं ज्ञातिभिर्मधुसूदन।
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! युद्धस्थल में मुझसे ऐसे वचन सुनकर ये क्षत्रिय मुझे अयोग्य समझेंगे, परन्तु मैं अपनी जाति के इन भाइयों के साथ युद्ध करना पसन्द नहीं करता॥10 1/2॥
 
Madhusudana! On hearing such words from me on the battlefield, these Kshatriyas will think that I am incapable, but I do not like to fight with these brothers of my caste.॥ 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)