श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.96.1 
संजय उवाच
पुत्रं विनिहतं श्रुत्वा इरावन्तं धनंजय:।
दु:खेन महताऽऽविष्टा नि:श्वसन् पन्नगो यथा॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! अपने पुत्र इरावान के वध का वृत्तांत सुनकर अर्जुन अत्यंत दुःखी हो गए। वे सर्प के समान लम्बी-लम्बी साँसें लेने लगे।
 
Sanjaya says - O King! Arjuna was very sad on hearing the story of the killing of his son Iravan. He started taking long breaths like a snake.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)