श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  6.95.81 
दृष्ट्वा च पाण्डवो भ्रातॄन् युध्यमानान् महारथान्।
त्वरितो भरतश्रेष्ठ तत्रायुध्यत् किरञ्छरान्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! पाण्डुनंदन अर्जुन अपने कुशल भाइयों को युद्ध करते देख तुरन्त ही बाणों की वर्षा करते हुए युद्ध करने लगे॥81॥
 
Bharatshrestha! Pandanu Nandan Arjun, seeing his expert brothers fighting, immediately started fighting with a shower of arrows. 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)