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mahabharat 6.95.75: फिर तीन बाणों से उसने उसके सिंहचिह्नित ध्वज को काट डाला तथा तीन अन्य पंखयुक्त बाणों से उसके सारथि को भी घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  6.95.75 
ध्वजं केसरिणं चास्य चिच्छेद विशिखैस्त्रिभि:।
निर्बिभेद त्रिभिश्चान्यै: सारथिं चास्य पत्रिभि:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
फिर तीन बाणों से उसने उसके सिंहचिह्नित ध्वज को काट डाला तथा तीन अन्य पंखयुक्त बाणों से उसके सारथि को भी घायल कर दिया।
 
Then with three arrows he cut off his lion-marked flag and with three other feathered arrows he pierced his charioteer as well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)