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mahabharat 6.95.62-63h: उस तेजस्विनी ने उस महान त्रिशूल को उपर्युक्त बाण से काट डाला। वह स्वर्ण-मंडित त्रिशूल दो टुकड़ों में टूटकर ऊपर की ओर उछला। उस समय वह इन्द्र के हाथ से गिरकर महान वज्र के समान शोभायमान हो उठा।   |   mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 62-63h
 
 
श्लोक  6.95.62-63h 
चिच्छेद तन्महच्छूलं तेन बाणेन वेगवान्।
उत्पपात द्विधा च्छिन्नं शूलं हेमपरिष्कृतम्॥ ६२॥
महाशनिर्यथा भ्रष्टा शक्रमुक्ता नभोगता।
 
 
अनुवाद
उस तेजस्विनी ने उस महान त्रिशूल को उपर्युक्त बाण से काट डाला। वह स्वर्ण-मंडित त्रिशूल दो टुकड़ों में टूटकर ऊपर की ओर उछला। उस समय वह इन्द्र के हाथ से गिरकर महान वज्र के समान शोभायमान हो उठा।
 
That swift king cut that great trident with the above mentioned arrow. That golden decorated trident broke into two pieces and leapt upwards. At that time it fell from Indra's hand and looked as beautiful as a great thunderbolt.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)