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mahabharat 6.95.59-60h: उस महाबली राक्षस ने हाथी को मारने की इच्छा से हाथ में एक पवित्र त्रिशूल लिया, जो पर्वतों को भी भेद सकता था। फिर उसने अचानक उसे फेंक दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 59-60h
 
 
श्लोक  6.95.59-60h 
जग्राह विमलं शूलं गिरीणामपि दारणम्॥ ५९॥
नागं जिघांसु: सहसा चिक्षेप च महाबल:।
 
 
अनुवाद
उस महाबली राक्षस ने हाथी को मारने की इच्छा से हाथ में एक पवित्र त्रिशूल लिया, जो पर्वतों को भी भेद सकता था। फिर उसने अचानक उसे फेंक दिया।
 
With the desire to kill the elephant, that mighty demon took in his hand a pure trident, which could pierce even the mountains. Then suddenly he hurled it. 59 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)