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mahabharat 6.95.55-56h: वह हाथी बड़े क्रोध में भरकर युद्धभूमि में इधर-उधर दौड़ते हुए रथों, हाथियों, घुड़सवारों सहित घोड़ों और लाखों पैदल सैनिकों के समूहों को कुचलने लगा।   |   mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  6.95.55-56h 
रथसंघांस्तथा नागान् हयांश्च हयसादिभि:।
पादातांश्च सुसंक्रुद्ध: शतशोऽथ सहस्रश:॥ ५५॥
अमृद्नात् समरे नाग: सम्प्रधावंस्ततस्तत:।
 
 
अनुवाद
वह हाथी बड़े क्रोध में भरकर युद्धभूमि में इधर-उधर दौड़ते हुए रथों, हाथियों, घुड़सवारों सहित घोड़ों और लाखों पैदल सैनिकों के समूहों को कुचलने लगा।
 
That elephant, in great anger, trampled the groups of chariots, elephants, horses with horsemen, and hundreds of thousands of foot soldiers running here and there in the battleground. 55 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)