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mahabharat 6.95.5: परंतप! मेरे साथ मेरी ये ग्यारह प्रसिद्ध अक्षौहिणी सेनाएँ भी आपके अधीन हैं॥5॥   |   mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.95.5 
एकादश समाख्याता अक्षौहिण्यश्च या मम।
निदेशे तव तिष्ठन्ति मया सार्धं परंतप॥ ५॥
 
 
अनुवाद
परंतप! मेरे साथ मेरी ये ग्यारह प्रसिद्ध अक्षौहिणी सेनाएँ भी आपके अधीन हैं॥5॥
 
Parantapa! Along with me, these eleven famous Akshauhini armies of mine are under your command.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)