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mahabharat 6.95.45-46h: महामना दशार्ण राजा के गजराज को रोका हुआ देखकर समस्त पाण्डव सैनिक भी सुप्रतीक को साधु कहकर उसकी स्तुति करने लगे ॥45 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  6.95.45-46h 
वारितं प्रेक्ष्य नागेन्द्रं दशार्णस्य महात्मन:॥ ४५॥
साधु साध्विति सैन्यानि पाण्डवेयान्यपूजयन्।
 
 
अनुवाद
महामना दशार्ण राजा के गजराज को रोका हुआ देखकर समस्त पाण्डव सैनिक भी सुप्रतीक को साधु कहकर उसकी स्तुति करने लगे ॥45 1/2॥
 
Seeing Mahamana Dasharna King's Gajraj being stopped, all the Pandava soldiers also started praising Suprateek by calling him a saint. 45 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)