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mahabharat 6.95.44-45h: गजराज सुप्रतीक ने युद्धस्थल में उस हाथी को अपनी ओर आने से उसी प्रकार रोक दिया जैसे तटवर्ती भूमि समुद्र को आगे बढ़ने से रोक देती है ॥44 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  6.95.44-45h 
तमापतन्तं समरे गजं गजपति: स च॥ ४४॥
दधार सुप्रतीकोऽपि वेलेव मकरालयम्।
 
 
अनुवाद
गजराज सुप्रतीक ने युद्धस्थल में उस हाथी को अपनी ओर आने से उसी प्रकार रोक दिया जैसे तटवर्ती भूमि समुद्र को आगे बढ़ने से रोक देती है ॥44 1/2॥
 
Gajaraja Suprateek stopped that elephant from coming towards him in the battle-field in the same manner as the shore-land stops the ocean from advancing. ॥ 44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)