vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध
»
श्लोक 43-44h
श्लोक
6.95.43-44h
दशार्णाधिपतिश्चापि गजं भूमिधरोपमम्॥ ४३॥
समास्थितोऽभिदुद्राव भगदत्तस्य वारणम्।
अनुवाद
तत्पश्चात् दषार्ण देश का राजा भी पर्वताकार हाथी पर सवार होकर भगदत्त के हाथी की ओर बढ़ा।
Thereafter the king of the country of Dasarna also mounted on a mountain-sized elephant and advanced towards Bhagadatta's elephant. 43 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×