श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 40-42h
 
 
श्लोक  6.95.40-42h 
केकयाश्चाभिमन्युश्च द्रौपदेयाश्च सर्वश:।
दशार्णाधिपति: शूर: क्षत्रदेवश्च मारिष॥ ४०॥
चेदिपश्चित्रकेतुश्च संरब्धा: सर्व एव ते।
उत्तमास्त्राणि दिव्यानि दर्शयन्तो महाबला:॥ ४१॥
तमेकं कुञ्जरं क्रुद्धा: समन्तात् पर्यवारयन्।
 
 
अनुवाद
आर्य! केकयराज अभिमन्यु, द्रौपदी के पाँचों पुत्र, दशार्ण के पराक्रमी राजा, क्षत्रराज, चेदिराज धृष्टकेतु और चित्रकेतु - ये सभी महारथी क्रोध में भरकर अपने उत्तम दिव्यास्त्रों का प्रदर्शन करते हुए उस एक हाथी को चारों ओर से घेरकर क्रोधपूर्वक खड़े हो गए। ॥40-41 1/2॥
 
Arya! Prince of Kekaya, Abhimanyu, the five sons of Draupadi, the valiant king of Dasharna, the king of Kshatra, the king of Chedi, Dhrishtaketu and Citraketu - all these mighty warriors, filled with fury and displaying their excellent divine weapons, stood angrily surrounding that single elephant from all sides. ॥ 40-41 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)