श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  6.95.18-19 
राक्षसं क्रूरकर्माणं यथेन्द्रस्तारकं पुरा॥ १८॥
तव दिव्यानि चास्त्राणि विक्रमश्च परंतप।
समागमश्च बहुभि: पुराभूदमरै: सह॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जैसे पूर्वकाल में इन्द्र ने तारकासुर की गति रोक दी थी, वैसे ही तुम भी उस क्रूर दैत्य को रोको। परंतप! तुम्हारे पास दिव्यास्त्र हैं। तुम महान पराक्रमी हो और पूर्वकाल में तुमने अनेक देवताओं के साथ युद्ध किया है।॥18-19॥
 
‘Just as Indra had stopped the progress of Tarakasur in the past, similarly you too should stop that cruel demon. Parantapa! You have divine weapons. You have great valour and in the past you have fought with many gods.॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)