श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.95.10 
शृणु राजन् मम वचो यत् त्वां वक्ष्यामि कौरव।
यथा त्वया महाराज वर्तितव्यं परंतप॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘राजन! कुरुपुत्र! मैं जो कुछ कहता हूँ, उसे ध्यानपूर्वक सुनो। हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले राजन! तुम्हें कैसा आचरण करना चाहिए, उसे सुनो।॥10॥’
 
‘King! Son of Kuru! Listen carefully to what I tell you. O King who torments the enemies! Listen to how you should behave.॥ 10॥ ’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)