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mahabharat 6.94.5-6h: महाराज! उस बाण से दुर्योधन ने भीमसेन की छाती पर गहरा घाव कर दिया। इससे अत्यन्त घायल होकर महाबली भीमसेन व्याकुल हो उठे और अपने मुख के दोनों कोनों को चाटते हुए अपनी स्वर्णमयी ध्वजा का सहारा लिया।   |   mahabharat अध्याय 6.94: दुर्योधन और भीमसेनका एवं अश्वत्थामा और राजा नीलका युद्ध तथा घटोत्कचकी मायासे मोहित होकर कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन और भीमसेनका एवं अश्वत्थामा और राजा नीलका युद्ध तथा घटोत्कचकी मायासे मोहित होकर कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  6.94.5-6h 
तेनोरसि महाराज भीमसेनमताडयत्।
स गाढविद्धो व्यथित: सृक्किणी परिसंलिहन्॥ ५॥
समाललम्बे तेजस्वी ध्वजं हेमपरिष्कृतम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! उस बाण से दुर्योधन ने भीमसेन की छाती पर गहरा घाव कर दिया। इससे अत्यन्त घायल होकर महाबली भीमसेन व्याकुल हो उठे और अपने मुख के दोनों कोनों को चाटते हुए अपनी स्वर्णमयी ध्वजा का सहारा लिया।
 
Maharaj! With that arrow, Duryodhan inflicted a deep wound on Bhimasena's chest. Being badly wounded by that, the illustrious Bhimasena became distressed and licking both the corners of his mouth, he took support of his golden decorated flag. 5 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)