श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन और भीमसेनका एवं अश्वत्थामा और राजा नीलका युद्ध तथा घटोत्कचकी मायासे मोहित होकर कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  6.94.34-35 
तत: संधाय विमलान् भल्लान् कर्मारमार्जितान्॥ ३४॥
जघान चतुरो वाहान् सारथिं ध्वजमेव च।
सप्तमेन च भल्लेन नीलं विव्याध वक्षसि॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद उसने धनुष पर सात चमकदार बाण चढ़ाए और उन्हें चलाया। चार बाणों से उसने नील के चार घोड़ों को मार डाला, पाँचवें बाण से उसके सारथि को मार डाला। छठे बाण से उसने नील का ध्वज काट डाला और सातवें बाण से नील की छाती पर वार किया।
 
Thereafter he placed seven polished arrows on the bow and shot them. With four of them he killed Neel's four horses and with the fifth he killed his charioteer. With the sixth he cut down his flag and with the seventh arrow he struck Neel's chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)