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mahabharat 6.94.18: तब महाधनुर्धर भीमसेन ने बड़ी शीघ्रता से द्रोणाचार्य की बायीं पसली में दस बाण मारकर उन्हें घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.94: दुर्योधन और भीमसेनका एवं अश्वत्थामा और राजा नीलका युद्ध तथा घटोत्कचकी मायासे मोहित होकर कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन और भीमसेनका एवं अश्वत्थामा और राजा नीलका युद्ध तथा घटोत्कचकी मायासे मोहित होकर कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.94.18 
तं प्रत्यविध्यद् दशभिर्भीमसेन: शिलीमुखै:।
त्वरमाणो महेष्वास: सव्ये पार्श्वे महाबल:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तब महाधनुर्धर भीमसेन ने बड़ी शीघ्रता से द्रोणाचार्य की बायीं पसली में दस बाण मारकर उन्हें घायल कर दिया।
 
Then the mighty archer Bhimasena, in great haste, wounded Dronacharya by shooting ten arrows into his left rib.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)