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mahabharat 6.93.38: कुछ हाथी बाणों से घायल थे, कुछ के शरीर में भाले लगे हुए थे और वे सभी जोर-जोर से चिल्लाते हुए इधर-उधर भाग रहे थे। उस समय वे शिखरहीन पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.93: घटोत्कचकी रक्षाके लिये आये हुए भीम आदि शूरवीरोंके साथ कौरवोंका युद्ध और उनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 93: घटोत्कचकी रक्षाके लिये आये हुए भीम आदि शूरवीरोंके साथ कौरवोंका युद्ध और उनका पलायन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.93.38 
नाराचनिहतास्त्वन्ये तथा विद्धाश्च तोमरै:।
विनदन्तोऽभ्यधावन्त विशृंगा इव पर्वता:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
कुछ हाथी बाणों से घायल थे, कुछ के शरीर में भाले लगे हुए थे और वे सभी जोर-जोर से चिल्लाते हुए इधर-उधर भाग रहे थे। उस समय वे शिखरहीन पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Some elephants were wounded by arrows, some had spears stuck in their bodies and all of them were running here and there screaming loudly. At that time they looked like peakless mountains.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)