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mahabharat 6.93.35: कई हाथियों के दाँतों के अगले हिस्से टुकड़े-टुकड़े हो रहे थे। कई के माथे कुल्हाड़ियों के वार से फटे हुए थे और वे गरजते बादलों की तरह चीखते हुए इधर-उधर भाग रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.93: घटोत्कचकी रक्षाके लिये आये हुए भीम आदि शूरवीरोंके साथ कौरवोंका युद्ध और उनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 93: घटोत्कचकी रक्षाके लिये आये हुए भीम आदि शूरवीरोंके साथ कौरवोंका युद्ध और उनका पलायन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.93.35 
केचिद् भिन्ना विषाणाग्रैर्भिन्नकुम्भाश्च तोमरै:।
विनदन्तोऽभ्यधावन्त गर्जमाना घना इव॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
कई हाथियों के दाँतों के अगले हिस्से टुकड़े-टुकड़े हो रहे थे। कई के माथे कुल्हाड़ियों के वार से फटे हुए थे और वे गरजते बादलों की तरह चीखते हुए इधर-उधर भाग रहे थे।
 
Many elephants were being torn apart by the front part of their tusks. Many had their foreheads torn by the blows of the tomahawks and they were running here and there shrieking like the roaring clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)