Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.93.27: हाथियों, घोड़ों और मनुष्यों के रक्त और अंतड़ियों की एक भयानक नदी बह रही थी, जिसमें बाल खरपतवार और घास की तरह दिख रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.93: घटोत्कचकी रक्षाके लिये आये हुए भीम आदि शूरवीरोंके साथ कौरवोंका युद्ध और उनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 93: घटोत्कचकी रक्षाके लिये आये हुए भीम आदि शूरवीरोंके साथ कौरवोंका युद्ध और उनका पलायन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.93.27 
गजवाजिमनुष्याणां शोणितान्त्रतरङ्गिणी।
प्रावर्तत नदी तत्र केशशैवलशाद्वला॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हाथियों, घोड़ों और मनुष्यों के रक्त और अंतड़ियों की एक भयानक नदी बह रही थी, जिसमें बाल खरपतवार और घास की तरह दिख रहे थे।
 
A horrible river of blood and intestines of elephants, horses and men flowed, in which hair looked like weeds and grass.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)