Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.93.24: महाराज! उस असह्य काले और लाल रंग की धूल ने सम्पूर्ण युद्धभूमि को ढक लिया था। उस समय हमारे पक्ष और शत्रु पक्ष के योद्धा एक-दूसरे को पहचान नहीं पा रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.93: घटोत्कचकी रक्षाके लिये आये हुए भीम आदि शूरवीरोंके साथ कौरवोंका युद्ध और उनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 93: घटोत्कचकी रक्षाके लिये आये हुए भीम आदि शूरवीरोंके साथ कौरवोंका युद्ध और उनका पलायन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.93.24 
धूम्रारुणं रजस्तीव्रं रणभूमिं समावृणोत्।
नैव स्वे न परे राजन् समजानन् परस्परम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस असह्य काले और लाल रंग की धूल ने सम्पूर्ण युद्धभूमि को ढक लिया था। उस समय हमारे पक्ष और शत्रु पक्ष के योद्धा एक-दूसरे को पहचान नहीं पा रहे थे।
 
Maharaj! That unbearable dust of black and red colour covered the entire battlefield. At that time the warriors of our side and the enemy side were not able to recognize each other. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)