श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 93: घटोत्कचकी रक्षाके लिये आये हुए भीम आदि शूरवीरोंके साथ कौरवोंका युद्ध और उनका पलायन  »  श्लोक 12-15
 
 
श्लोक  6.93.12-15 
वेगेन महता राजन् पर्वकाले यथोदधि:॥ १२॥
तमन्वगात् सत्यधृति: सौचित्तिर्युद्धदुर्मद:।
श्रेणिमान् वसुदानश्च पुत्र: काश्यस्य चाभिभू:॥ १३॥
अभिमन्युमुखाश्चैव द्रौपदेया महारथा:।
क्षत्रदेवश्च विक्रान्त: क्षत्रधर्मा तथैव च॥ १४॥
अनूपाधिपतिश्चैव नील: स्वबलमास्थित:।
महता रथवंशेन हैडिम्बं पर्यवारयन्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजन! जैसे पूर्णिमा के दिन समुद्र बड़े वेग से चलता है, उसी प्रकार भीमसेन बड़े वेग से आगे बढ़े। उनके पीछे सत्यधृति, वीर योद्धा सौचित्त, श्रेणिमान, वसुदान, काशिराज के पुत्र अभिभु, अभिमन्यु आदि योद्धा, द्रौपदी के पाँचों पराक्रमी पुत्र, पराक्रमी क्षत्रदेव, क्षात्रधर्मा, अपने बल पर पूर्ण विश्वास रखने वाले अनूपदेश के राजा नील - इन सभी वीरों ने रथियों की विशाल सेना के साथ हिडिम्बकुमार घटोत्कच को चारों ओर से घेर लिया। 12-15॥
 
Rajan! Just as the ocean moves with great speed on the full moon day, Bhimsen moved forward with great speed. Behind them, Satyadhriti, the brave warrior Sauchitti, Shreniman, Vasudan, Kashiraj's son Abhibhu, Abhimanyu etc. warriors, the five mighty sons of Draupadi, the mighty Kshatradev, Kshatradharma, King Neel of Anupadesh, who had full confidence in his strength - all these heroes along with a huge army of chariots surrounded Hidimbakumar Ghatotkacha from all sides. 12-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)