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mahabharat 6.92.d1h-14: घटोत्कच का पराक्रम देखकर वह उसका सामना करने में असमर्थ हो गया। क्षत्रिय धर्म और अपने गौरव को ध्यान में रखते हुए, भागने का अवसर पाकर भी राजा दुर्योधन पर्वत के समान अडिग खड़ा रहा। 14.   |   mahabharat अध्याय 6.92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध  »  श्लोक d1h-14
 
 
श्लोक  6.92.d1h-14 
(अशक्त: प्रतियोद्धुं वै दृष्ट्वा तस्य पराक्रमम्।)
क्षत्रधर्मं पुरस्कृत्य आत्मनश्चाभिमानिताम्।
प्राप्तेऽपक्रमणे राजा तस्थौ गिरिरिवाचल:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
घटोत्कच का पराक्रम देखकर वह उसका सामना करने में असमर्थ हो गया। क्षत्रिय धर्म और अपने गौरव को ध्यान में रखते हुए, भागने का अवसर पाकर भी राजा दुर्योधन पर्वत के समान अडिग खड़ा रहा। 14.
 
He saw Ghatotkacha's prowess and became unable to face him. Keeping his Kshatriya Dharma and his pride in mind, even after getting the opportunity to flee, King Duryodhan stood firm like a mountain. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)