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mahabharat 6.92.4-5h: उन बाणों से घायल होकर वह राक्षस अपने शरीर से रक्त की धारा बहाने लगा, जैसे कोई राज हाथी कुम्भस्थल से मदिरा की धारा बहाता है। उसने राजा दुर्योधन को नष्ट करने का मन बना लिया। ॥4 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  6.92.4-5h 
स तैर्विद्ध: स्रवन् रक्तं प्रभिन्न इव कुञ्जर:॥ ४॥
दध्रे मतिं विनाशाय राज्ञ: स पिशिताशन:।
 
 
अनुवाद
उन बाणों से घायल होकर वह राक्षस अपने शरीर से रक्त की धारा बहाने लगा, जैसे कोई राज हाथी कुम्भस्थल से मदिरा की धारा बहाता है। उसने राजा दुर्योधन को नष्ट करने का मन बना लिया। ॥4 1/2॥
 
Wounded by those arrows, the demon started gushing out blood from his body like a king elephant gushing out a stream of intoxicated alcohol from a Kumbha Sthal. He made up his mind to destroy King Duryodhana. ॥ 4 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)