श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  6.92.36-37h 
न्यषीदत् स्वरथोपस्थे शोणितेन परिप्लुत:।
तत: पुनरमेयात्मा नाराचान् दश पञ्च च॥ ३६॥
भूरिश्रवसि संक्रुद्ध: प्राहिणोद् भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
इससे विकर्ण अपने रथ के पिछले भाग में व्याकुल होकर बैठ गया, उसका सारा शरीर रक्त से नहा गया । भरतश्रेष्ठ ! तत्पश्चात आत्म-विश्वास से परिपूर्ण घटोत्कचन ने क्रोधित होकर भूरिश्रवा पर पन्द्रह शंख छोड़े । 36 1/2॥
 
Due to this, Vikarna sat distraught in the back part of his chariot, his entire body was bathed in blood. Bharatshrestha! After that, Ghatotkachna, who was full of self-confidence, became angry and fired fifteen slogans on Bhurishrava. 36 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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