श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.92.34 
बाह्लीकं च त्रिभिर्बाणै: प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे।
कृपमेकेन विव्याध चित्रसेनं त्रिभि: शरै:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने तीन बाणों से बह्लीक की छाती पर गहरा घाव कर दिया। एक बाण से उन्होंने कृपाचार्य को और तीन बाणों से चित्रसेन को घायल कर दिया।
 
Thereafter he inflicted a deep wound on Bahlika's chest with three arrows. With one arrow he pierced Kripacharya and with three arrows he pierced Chitrasena.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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