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mahabharat 6.92.32-33: तदनन्तर महाबली दैत्यराज घटोत्कच अत्यन्त क्रोधित हो गया, तब भैरव ने गर्जना करके अपना विशाल धनुष खींच लिया और अर्धचन्द्राकार बाण से द्रोणाचार्य का धनुष काट डाला। फिर एक भल्ल ने सोमदत्त की ध्वजा तोड़कर सिंहनाद किया। 32-33॥   |   mahabharat अध्याय 6.92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  6.92.32-33 
तत: परमसंक्रुद्धो विस्फार्य सुमहद् धनु:।
राक्षसेन्द्रो महाबाहुर्विनदन् भैरवं रवम्॥ ३२॥
आचार्यस्यार्धचन्द्रेण क्रुद्धश्चिच्छेद कार्मुकम्।
सोमदत्तस्य भल्लेन ध्वजं चोन्मथ्य चानदत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर महाबली दैत्यराज घटोत्कच अत्यन्त क्रोधित हो गया, तब भैरव ने गर्जना करके अपना विशाल धनुष खींच लिया और अर्धचन्द्राकार बाण से द्रोणाचार्य का धनुष काट डाला। फिर एक भल्ल ने सोमदत्त की ध्वजा तोड़कर सिंहनाद किया। 32-33॥
 
Thereafter, the mighty demon king Ghatotkacha became very angry, Bhairav ​​roared and pulled out his huge bow and cut off Dronacharya's bow with a half-moon shaped arrow. Then a Bhalla broke the flag of Somdutt and made a lion's cry. 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)