श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.92.31 
वीरबाहुविसृष्टानां तोमराणां विशाम्पते।
रूपमासीद् वियत्स्थानां सर्पाणामिव सर्पताम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! जब वीरों की भुजाओं से छूटे हुए बाण आकाश में उठते, तब वे बड़े वेग से उड़ते हुए सर्पों के समान प्रतीत होते थे॥31॥
 
O Prajanath! When the arrows released from the arms of the heroes would rise into the sky, they would look like serpents flying at a great speed. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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